Wednesday, January 23, 2013

Subhash Chandra Bosh - The great soul




अंधेर  घर  में  रोशीनी  सी,
भारत  के   युवा  थे  वो,
सूखे   पेड़  के  हरे  पत्ते  सी,
आशा  के  किरण  थे  वो।

युवा  के  आदर्श   थे,
बुजुर्गो   की  शान ,
बच्चो   के   दोस्त  थे ,
भारतीयों   की  जान,

 अंग्रेजो   का  यूँ   शासन   करना,
उन्हें  नहीं  भाता  था,
भारतीयों   का  अंग्रेजो   के  अंदर  काम  करना ,
उन्हें  नहीं  सुहाता  था।

गाँव -गाँव  में घर -घर  में,
आज़ादी   का  सन्देश   देते  थे,
भारत  के  कोने -कोने   में,
लोगो  को  प्रेरणा  देते  थे।

रंग  लायी   उनकी   ये  मेहनत,
हो  गया   भारत  स्वतंत्र,
बन  गया  भारतीयों   में  हिम्मत,
नहीं   चला  अंग्रेजो   का  तंत्र - मंत्र ,

 दुश्मन  के  वो  दुश्मन   थे,
दोस्त  के  वो   दोस्त ,
 हर  जगह  ऊपर   रहा है  जिनका  नाम,
वो  है  "सुभाष  चन्द्र  बोश ".




  

Saturday, August 18, 2012

Something for you...



 Sun rises,
The flower blooms for you...

Flower gives it nectar to bee,bee produces honey,
The sweetness of honey is for you..

The tides of ocean brings the shell to the bank,the shell contains pearls,
These pearls are for you..

When spring comes,the birds sings,
The song of birds are for you..

The snow of winter covers the mountains to look it adorn,
The beauty of nature is for you..

When the wind blows,on its tunes the trees dances,
The beauty of nature is for you..

I like flowers,
I like sweetness of honey,
I like the whitness of pearl,
I like the song of bird,
I like the beautiful mountain covered with snow,
I like the dance of the trees...

Oh..!! dear see I like all the things that is for you..
is there in me also something for me...

                                                                                                                          

Sunday, July 29, 2012

A Physical Letter

My dear,
E=mc square

The day i have taken you as my reference point.I am in full motion throughout day n night.You are the only girl i have seen with such luminous intensity,that my resistivity towards u is decreasing day by day.I am fully positively charged for u n my potential difference is also increasing.The frequency of ur voice is just making my heart beat in oscillatory motion.I am just falling in luv with u at the rate of 9.8 meter per second square.The change in velocity of my heart is directly proportional to ur luminous  intensity.Now we are parallel vectors and i want to make our-self collinear vectors making an angle of 0 degree.My love for u is not a unit vector,it has very high value.I just use to add my life with ur life by using parallelogram law of addition.I want to hold u just like vernier caliper holds the object in between it.After finding the angle between u n me i am making my self a good conductor so that there will be no zero error in between us.You have become my least count.I used to put my right hand on my heart and used to curl my fingers towards u through smallest angle and my thumb points towards you.I am the vector and you are my direction.We both are incomplete without each other.So,there needs to be resolution of ur heart to my heart.My internal force for u is just like vector A divided by vector B which is not defined.Now my heart started beating equivalent to the speed of light.So,you plz think about the motion of my heart and tell the resultant vector.

Your's,
v=u+at

Saturday, May 21, 2011

26/11 The black Day.........


बस  याद  करो वो  दिन,
जब  हुऐ  थे  जुर्म  संगीन,
दहल  उठी   थी  मुंबई  की  ज़मीन,
और  हो  गये  थे  सबके  चेहरे  रंगीन,

ये  दिन  थे  कितने  अजीब,
पर  वही  थे  मुंबई  के नसीब,
याद  बन के  रह  गए  जो  थे,
उस  दुर्घटना के  करीब.

कुर्बान  हो गए  वो  सारे  लोग,  
जो  नहीं  थे दुसरो  की तरह  दरपोक,
आँखों  में   नमी  छोर  गए चले  गए  वो  लोग..............
चले  गए  वो  लोग........


Sunday, April 24, 2011

A girl child

पुत्र  के  जन्म  लेते ही,
घर में  लहर  ख़ुशी  की  छा जाती,
लेकिन  कन्या इस  धरती पर,
एक  समस्या  बन  जाती.

कन्या  तो  होती भगवान,
तो  क्यों  करते  उसका  अपमान.
जितना  है  ये  पुत्रो  का  संसार,
उतना  ही  है  कन्याओं  का  घर  बार.

ऐसा  क्यों  करते  है  लोग,
आपस  में  रखे  सहयोग.

पर  इन  बातो  का  क्या  करना  है ,
प्रेम  से  जीवन  में  आगे  बढ़ना  है.

पुत्र  हो  या  पुत्री,
सब  का  मालिक  एक  है ,
और  हम  उसके  कठपुतली.













Sunday, April 17, 2011

ज़िन्दगी की सीख

दिन - दिन  भर  सोना,
उठे  भी  तो  भाग्य  पर  रोना,
बहुत  हुआ  तो  किताबो  में  दिमाग  खोना.




थोरी  नींद  जगी  तो  facebook  करना,
इन  सब  से  सच  मनो  कुछ  नहीं  होना,
ज़िन्दगी  को  ऐसा  मत  बनाओ  की  लगे  भोझा  उठाना,




दुनिया  में  बहुत  कामयाबी  है  मित्र,
ज़रा  उठो  हिम्मत  तो  करो  न,
थोरा  हाथ  पैर  चलाओ  न,
अपने  सपनो  को  पूरा  करने  की  कोशिश  तो  करो  न...............!!!!!!












Monday, September 13, 2010

संगर्श्पूर्ण बचपन

वो  नन्हे - नन्हे  पंजे  थे,
वो  सरेलैक  का  स्वाद,
वो  छोटे - छोटे  खिलोने  थे,
जो थी  बचपन  की  याद.

स्कूल   जाना  हमने  शरू  किया,
आ  गया  तन  में  एक  नया  जोश,
पढने  लिखने  में  मान  इतना  खो  गया,
न  रहा  खाने  पीने  का  होश.
 .
बैग  उठाते  उठाते  झुक  गए  हमारे  कंधे,
अब  तो  इतना  पढना  परता  है,
की  प्रोजेक्ट  बनाते - बनाते  ही,
बीत  जाते  है  हमारे  सन्डे.

हर  रोज़  एक  नया  टेस्ट,
हर  रोज़  एक  नयी  प्रोजेक्ट,
शिक्षक  को  देने  होते  है  सिर्फ  एक,
पर  हमे  पुरे  करने  होते  है  पांचो सब्जेक्ट.

क्या  बीतती  है  हम  पर  कोई  हमसे  तो  पूछे,
दिन - रात  एक  कर  के  हम  प्रोजेक्ट  करते  है  ऐसे,
जैसे  पानी  की  तलाश  में  रेगिस्तान  में  घूम  रहे
हो  हम  बच्चे.
 .
इतने  तनाव  को  कैसे  सहेंगे  हम  बचे,
इसे  कम  करने  के  बारे  में  कोई  तो  सोचे.
और  कितना  करोगे  आप  हमे  परेशां,
ज़रा  जी  लेने  दो  हमे  अपने  बचपन  का जहाँ
बस  यही  है  हमारा  अरमान.